Learn Free Digital Marketing in Hindi - डिजिटल मार्केटिंग क्या है [Chapter 2]

हेय दोस्तों, जैसा की हमने पेहले चैप्टर में सीखा डिजिटल मार्केटिंग का इंट्रोडक्शन। आखिर वो कोनसी चीज़े है जो डिजिटल मार्केटिंग में इन्क्लूड होती है जिससे की हम डिजिटल मार्केटिंग कर सकते है। आजके इस भाग में डिजिटल मार्केटिंग क्या है यह सीखेंगे।


Marketing :

डिजिटल मार्केटिंग जानने से पहले हम मार्केटिंग को समझेंगे, मार्केटिंग क्या होती है ?
किसी प्रोडक्ट को अलग अलग तरीको से प्रोमोट करना मार्केटिंग है। जिसमे लोगो के समूह तक अपना प्रोडक्ट पोहचना होता है। इसमें हम अख़बार, TV, रेडिओ, मैगज़ीन और कई ads और फिर जैसे रास्ते पर बैनर लगाया हुआ होता है यह सब माध्यम से मार्केटिंग किया जाता है।

Marketing कैसे किया जाता है :

मार्केटिंग के लिए सबसे पहले लोगो की requirement को समझना होता है, एक तरह से उनकी जरूरियात को ध्यान में रखाना है। अगर हम समज लेते है की कस्टमर की requirement क्या है फिर हमे सही तरह से उसे कन्वर्ट करना होता है। उसमे हमे उन प्रोडक्ट को सही जरूरियात लोगो तक उसे पोहचना होता है, और अगर हम यह काम perfectly कर देते है, तो हम एक सफल मार्केटर कहा जाते है।

इसमें "Why" और "How" का लौ लागु होता है की क्यूंकि करे और कैसे करे। इसमें कस्टमर की requirement पर फोकस किया जाता है। की सही मायने में लोगो की यह need है या नहीं। और फिर हमे लोगो को बेहतर तरीके से फुल फील कराना होता है।

जैसे की एक उदहरण से जानते है , हॉवर्ड शुल्त्ज स्टारबक्स के फाउंडर नहीं थे। ये सिएटल स्टारबक्स खुलने के 10 साल पेहले की बात है लेकिन आज सब स्टारबक्स को जिस नाम की वजह से जानते है वह है हॉवर्ड शुल्त्ज। दोस्तों स्टारबक्स ने एक तरह यूनाइटेड स्टेट की सोसाइटी बदल दी। स्टारबक्स के वजह से आज वहां कॉफी पिने की एक नया कल्चर बना दिया है यह इस वजह से,

हॉवर्ड शुल्त्ज से पेहले स्टारबक्स का ओनर सिर्फ कॉफी बेचता था। लेकिन हॉवर्ड की सोच इससे कई अधिक और कस्टमर के needs पर आधार थी वे लोगो को कॉफी तो बेचना चाहते थे लेकिन उसके साथ एक ऐसा माहौल में जहा सब रिलेक्स भी करे।

और इसी तरह जब भी कोई स्टारबक्स में कॉफी पिने जाता है तो काफी रिलेक्स हो कर कोई बुक पढता है, कई लेपटॉप में अपना काम करते है और दोस्त मिलके गपे मारते है यही वह सीक्रेट है जिससे की हॉवर्ड इतने सक्सेसफुल हुए, क्यूंकि उन्होंने एक सही requirement चुनी और उसे अमल किया जिसमे लोगो का भी समर्थन रहा।

तो अगर हम कस्टमर को उसके requirement अनुशार उसे प्रोडक्ट प्रदान करते है तो हमें सफल मार्केटर कहा जाता है।  लेकिन ये काम आसान नहीं कस्टमर काफी होशियार हो चुके है अगर वे मोबाइल शॉप से खरीदना चाहे उससे पेहले वे इंटरनेट पर चेक करते है जैसे प्राइस इमआई सब जांच करने क बाद अगर उनके requirement अनुशार प्रोडक्ट हुआ तो वे शॉप से नहीं खरीदते।

Digital Marketing History :

डिजिटल मार्केटिंग की हिस्ट्री को हमे समझते है...

  1. 1990 - Static Display Ads लांच हुई। जो सिर्फ चित्र ads थी जिसे कांटेक्ट कर हम उस साइट तक जा सकते थे। 
  2. 1993 - First Clickable Ads आयी जिसे हम क्लिक करके उस वेबसाइट तक पोहच सकते थे जो display ads से काफी अच्छी थी। 
  3. First Search Advertising Keyword जिसमे हमे यह पता चला की एक कीवर्ड के जरिये भी उस प्रोडक्ट और साइट पर जा सकते है। 
  4. 2000 - Google Adwords Launched हुआ जिसने advertising को नया रूप दिया जिसमे काफी नए नए तरीको से ads के लिए कैम्पेन बनाये जाते है और साइट को प्रोमोट भी किया जाता है। 
आजके युग में हम डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े हुए है हर वो कार्य जो हम रोज करते है जैसे सोशल मीडिया गूगल सर्च या फिर tweet करना यह सब डिजिटल तरीको से जुड़े हुए है। 

- डिजिटल मार्केटिंग को सरल भाषा में समझे तो एक प्रोडक्ट को ऑनलाइन के जरिये लोगो तक पोहचना। पेहले अख़बार और टीवी के मदद से लोगो तक पोहचते थे लेकिन अब डिजिटल तरीके से किया जाता है, इसमें फायदा यह है की रिजल्ट 100% मिलता है। जो टीवी के ads में नहीं मिलता।

जैसा की हमने ऊपर वर्ष दरमियान कैसे डिजिटल मार्केटिंग बदलता गया और उसमे कई सरे नए टूल्स फीचर्स आते गए, सिर्फ ads के जरिये प्रोमोट को हम डिजिटल मार्केटिंग नहीं कह सकते। गूगल द्वारा बनाये गए टूल्स जिससे उन ads कण्ट्रोल करना और उसे ट्रैक करना डिजिटल मार्केटिंग का हिस्सा है।

इसमें हमे हर चीज़ पता होनी चाहिए की ads कोनसी country में देखि जा रही है, लोग कोनसे कीवर्ड पर विजिट कर रहे है और फिर जेंडर से लेकर लोको की requirement तक प्रोडक्ट पोहच रहा है या नहीं यह सब डिजिटल मार्केटिंग में जरुरी है। जैसे की आप देख सकते है आजके समय में डिजिटल मार्केटिंग का विकाश काफी हो चुका है।

- उसके बाद आती दूसरी जरुरी बात content क्रिएट करना। यहाँ हमे सीखना है की एक सही कंटेंट कैसे बनाया जाये क्या हम सचमे लोगो को अपने प्रोडक्ट समझाने में सफल होते है। यह बोहत जरुरी है की एक सही कंटेंट बनाये और फिर लोगो के बीच उसे प्रोमोट किया जाये।

Traditional Marketing vs Digital Marketing :

अब हम जानेंगे की ट्रेडिशनल मार्केटिंग और डिजिटल मार्केटिंग में क्या अंतर है दोनों में कोनसी चीज़े शामिल होती है।

Traditional marketing - इसमें मोबाइल, टेलीफ़ोन, लेपटॉप, टीवी का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे की sms के जिरए टीवी पर के ads, कॉल द्वारा या अख़बार यह सब ट्रेडिशनल मार्केटिंग का हिस्सा है।

Digital marketing - इसमें facebook, instagram, email, youtube, twitter जैसे सोशल नेटव्रक शामिल है। इसमें हमारे मुताबिक ads चलायी जाती है। एक तरह से हमारा पूरा control होता है ads पर जैसे कोनसी ऑडियंस को टारगेट करना कितने उम्र के लोग, कितने दिन तक यह डिजिटल मार्केटिंग का पार्ट है।

ट्रेडिशनल मार्केटिंग और डिजिटल मार्केटिंग का एक बड़ा अंतर बताता हूँ जिससे आप समझ सकेंगे की क्यूंकि डिजिटल मार्केटिंग करनी चाहिए, या क्यों आपको फील्ड में रूचि रखनी चाहिए और इसके कई फायदे भी है।



→1. जैसा की हम ऊपर के इमेज में देख सकते है , जो पेपर advertising होती है उसमे reach करीब 1200000 होती है लेकिन उसके सामने हमे 19 लाख से 34 लाख तक पे करने होते है इतने पैसे देने पर हम सिर्फ 12 लाख तक reach कर सकते है। ऑनलाइन भी कई वेबसाइट है जो इतने पैसे लेने के बाद advertising करती है।

वही डिजिटल मार्केटिंग ads  की reach हमे करीब मिलियन से लेकर बिलियन तक पोहचा सकती है यही पावर है सोशल मीडिया की और डिजिटल मार्केटिंग की जहा पहले हम 12 लाख तक ही पोहच  सकते थे और आज डिजिटल मार्केटिंग एड्स से बिलियन तक लोगो तक पोहच सकते है।

→2. उसके बाद है targeted ऑडियंस पेपर ads में हम काफी low ऑडियंस तक पोहच सकते है यह की ना के बराबर।

वही डिजिटल ads  में हम very high ऑडियंस तक पोहच सकते है, मतलब की जब हम किसी प्रोडक्ट requirement को चुनते है तो यह गारंटी है की वहां तक हम पोहच सकते है।

→3. तीसरा है engagement, पेपर ads में शून्य प्रतिसत है क्यूंकि अगर कोई अख़बार में ads देखता है तो क्या वह उसे क्लिक कर वेबसाइट ओपन कर सकता है , नहीं। सिर्फ वह contact कर सकता है उससे अधिक कुछ नहीं।

डिजिटल ads में engagement काफी high होती है क्यूंकि जब किसी कीवर्ड के थ्रू कोई हमारे ads पर क्लिक करता है तो सीधे हमारे तक पोहचता है और फिर emails और सोशल नेटवर्क से वे हमे फॉलो करते है जिससे एंगेज बना रहता है।

→ 4. उसके बाद है pricing की, paper ads में हमे काफी पैसे देने होते है जो की हर कोई नहीं दे सकता इतनी बड़ी मात्रा में पैसे देना और रिजल्ट 100 % मिले उसकी भी गारंटी नहीं होती है।

डिजिटल ads में price काफी low होती है इतनी की हर कोई इसमें पैसे देकर ads चला सकता है। और उसमे गूगल आपको ग्लोबल ट्रैफिक देगा, इसमें कम प्राइस में काफी ट्रैफिक हमे मिलता है।  इस लिए pricing very low है।

→ 5. पेपर ads के अगर हम result की बाद करे की मेरा प्रोडक्ट लोगो में sell होगा या नहीं तो इसमें कोई गारंटी नहीं sell होगा और नहीं भी इसमें कोई गारंटी नहीं है

डिजिटल ads में बड़ी मात्रा में मुझे return मिलेगा क्यूंकि जब में ads चलाऊंगा तक ads के मेनू में यह पेहले से तय हो हो जायेगा की कितने ऑडियंस मुझे मिलेगी और एक प्रॉपर रिजल्ट भी देख सकता हूँ।इसमें pay per click का काम होता है जिसमे कीवर्ड और अन्य से लोग क्लिक करते आपकी वेबसाइट पर आते है बस इसके पैसे दने होते है गूगल को।

 तो यह बड़ा अंतर है पेपर ads और डिजिटल ads में।

आजके समय में हर छोटी सी छोटी चीज़ खरीदना लोग ऑनलाइन करते है जैसे की food आर्डर करना तो वे ऑनलाइन करते है, फिर कोई गैजेट लेना तो वे पहले ऑनलाइन चेक करेंगे उसके बाद ही दुकान जायेंगे। जैसे आप देख सकते है हम काफी बड़ी मात्रा से इंटरनेट पे आधार है।

अगर आप कोई बिज़नेस शुरू करते हो तो डिजिटल मार्केटिंग आपको काफी हेल्पफुल होगी क्यूंकि इससे आप अपने बिज़नेस से रिलेटेड टार्गेटेड ऑडिएंस तक आसानी से पोहच सकते है।

इसके बाद है की डिजिटल मार्केटिंग में जो ads चलती है वो किस प्रकार की होती है।

  • Search Engine 
  • Social Media
  • Email Marketing
  • Display Banner ads
  • Video marketing 
इन तरीको से हम डिजिटल मार्केटिंग के ads को चला सकते है। इन सब तरीके को हम आने वाले चैप्टर में स्टडी करेंगे। 

उसके बाद है 3 types जो डिजिटल मार्केटिंग में हमे पहले करनी होती है जो काफी मेटर करती है। 

  • डिजिटल मार्केटिन हमे सही तरह से करनी हो तो पहले हमे सही place पर रहना होगा, उसके बाद सही समय रखना होगा और फिर एक्टिव रहना होगा ताकि हम अपने कस्टमर को कैप्चर कर सके। 

ये चीज़े इस लिए जरुरी है क्यूंकि डिजिटल की फील्ड में काफी लोग दौड़ रहे है काम्पिटिसन काफी ज्यादा है इस लिए इसमें active रहना जरूरी है। 

इंटरनेट का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है उसके साथ ऑनलाइन शॉपिंग। अगर हमे कोई कैम्पेन रन करना हो तो low cost में कर सकते है लेकिन उसे हैंडल करना भी हमे आना चाहिए इसमें हम हर समय ऑनलाइन रह सकते है अगर रात के एक बजे भी कोई कैम्पेन चलाना हो तो वह भी कर सकते है। 

Digital Marketing Media :
  • Earned Media
  • Shared Media 
  • Owned Media 
  • Paid Media 
डिजिटल मार्केटिंग में यह चार मीडिया होते है इसमें Owned मीडिया यानि की हमारा कोई ब्लॉग है या फिर वेबसाइट सोशल नेटवर्क के जरिये यह काम कर सकते है। उसके बाद Paid मीडिया यानि की हम कुछ पैसे लगा कर कैम्पेन चलाये इसमें गूगल adwords से यह कार्य कर सकते है। फिर Shared मीडिया जिसमे हम सोशल नेटवर्क की थ्रू करे जिसमे हम पेमेंट भी कर सकते है। 

बाद Earned मीडिया काफी जरुरी मीडिया इसमें एक तरह से लोगो के साथ एंगेज करना कहते है जैसे की अगर ads को क्लिक कर कोई हमारे साइट पर आता है और हमारे कंटेंट को लाइक करता है तो वह हमे फॉलो करेगा। वैसे ही फेसबुक पर प्रोमोट करके जो लाइक्स और कमेंट मिलते है उससे हमारा पेज ग्रो होता है जो हमारे लिए बोहत अच्छी बात है। ( इसमें सिर्फ कंटेंट ही मेटर करता है )

तो यही आजका चैप्टर समाप्त होता है आजके भाग में हमने सीखा की डिजिटल मार्केटिंग क्या होती है और डिजिटल मार्केटिंग किसे कहते है। 

आशा है आपको भाग पसंद आये आप अपना email send करके हमारा मनोबल बढ़ा सकते है। 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद। 
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